अयोध्या में आज भव्य राम मंदिर का शिलान्यास

जय श्री राम..

आज भारत व भारत का स्वाभीमान एक नये युग में प्रवेश कर रहा है. भव्य राम मंदिर के भूमिपूजन के साथ ही बाहरी आक्रांताओं ने भारत की आत्मा को जो धूमिल किया था, उसका पुनरोदय हो रहा है. सभी भारतीयों का अभिनंदन व उन शहीदों को कोटि कोटि नमन जिनके बलिदान स्वरुप हम इस दिन के साक्षी बन रहे है.

कुछ समय से भारत एक ऐसे युग में जी रहा था जहां भगवान श्री राम का नाम लेना कम्युनल और सांप्रदायिक माना जाता था, जबकि अन्य धर्मों के साथ और अन्य धर्मों में सहभागिता सेक्युलर और धर्म निरपेक्षता माना जाता था. भारत ने कभी स्वतः किसी भी देश पर न तो आक्रमण किया और न ही किसी अन्य समुदाय या धर्म को मानने वाले व्यक्तियों का धर्म परिवर्तन करवाया. लेकिन भारतीयों के साथ इसके ठीक विपरीत हुआ. भारत ने हर समुदाय को अपने यहां जगह दी, सारी सुविधा तथा समानता दी है. पर इतिहास गवाह है की भारतीयों की आत्मा को बाहरी ताकतों ने बार-बार कुचला, उसे तहस-नहस किया. यह भी विडंबना है कि कुछ भारतीयों ने ही अपने व्यक्तिगत स्वार्थवश इस घोर अन्याय और पाप कार्य में अपनी सहभागिता दिखाई है. यह मानसिकता आज भी कुछ सीमा तक सक्रिय है. शायद उन्हें अपनी मानसिकता बदलने के लिए और समय लगेगा. भव्य राम मंदिर के भूमि पूजन के साथ ही आज इस मानसिकता और उस दमनकारी युग का अंत हो रहा है और भारत की सच्ची आत्मा का पुनरोदय हो रहा है. यह दिन भारत, भारतीयता और सनातन धर्म के अमरत्व की विजयश्री है, जो पूर्ण विश्व को आगे आने वाले कई युगों तक सत्य और कर्तव्य परायणता के पथ पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा और यही से विश्व कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा.

भारत विश्व के सभी धर्मों को समभाव से देखता है. भारत का मानना है कि सभी धर्मों का ध्येय ईश्वर प्राप्ति और मुक्ति है. सभी धर्म सत्य की खोज के लिये मानव को प्रेरित करते है. सभी धर्म अज्ञानता से ज्ञान की ले जाने के लिये एक माध्यम है. धर्म संस्थापकों ने विभिन्न देश, काल और परिस्थिति के अनुसार प्रार्थना और पूजा पद्धति के लिये दिशा निर्देश दिये होंगे, जिनसे मानव सत्य की खोज के लिये प्रेरित होता रहे. उन्होंने धर्म व्यक्ति और समुदायों को जोड़ने के लिये बनाये है, तोड़ने के लिये नही. सभी धर्मों की आत्मा सत्य से परिपूर्ण है, इसलिये धर्म समभाव ही अंतिम संवेदना और संदेश है. भारतीय सनातन धर्म इसी आस्था का द्योतक है. यही आस्था विश्व शांति का मार्ग हैं.

भगवान श्री राम भारत की संस्कृति की आत्मा है. भगवान राम मानवीय मूल्यों की वह पराकाष्ठा है जो हर हर युग में अमर और शाश्वत रहेगी. भगवान राम एक अच्छे पुत्र, एक सर्वश्रेष्ठ पुत्र, पति, भाई, सखा एवं राजा के प्रतीक है जो दैवी संपदा और मूल्यों की आखरी सीमा हो सकती है. इसीलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहा जाता है. उनके गुणों को धारण कर मानव ईश्वरत्व प्राप्त कर सकता है. उनके गुणों को धारण कर पूर्ण विश्व सुख – शांति और संपन्नता की अंतिम सीमा तक जा सकता है. एक ऐसे विश्व का निर्माण कर सकता है, जहां सबके लिए समान न्याय है, जहां सबके लिए समान अवसर और समान अधिकार है. एक ऐसा विश्व जहां हर बुराई का अंत संभव है. ऐसे विश्व को ही रामराज्य कहते हैं और यही रामराज्य भी है.

आइये आज हम सब मिलकर, हम सब भारतीय मिलकर चाहे वह हिन्दु हो या मुसलमान या अन्य कोई समुदाय के हो इस पावन राम मंदिर के शिलान्यास का उत्सव मनाये. क्योंकि अन्ततः सभी सम्प्रदायों का उद्गम तो केवल भारतीय है और श्री राम हम सबके पूर्वजों के प्रमुख मूल है. श्रीराम की भावना, उनके कार्य और उनका सम्पूर्ण जीवन सबके लिये वन्दनीय है.

उन सभी भारतीयों को नमन जिनकी आस्था में, जिनकी आत्मा में भगवान श्री राम विराजमान हैं. भगवान श्री राम सभी का कल्त्याण करें, सम्पूर्ण विश्व का कल्याण करें.

जय श्री राम. जय जय श्री राम.

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Manik Barmase

About Manik Barmase

The author, Manik Barmase, B. E. (Electrical) and MBA having superannuated from a major power sector public sector undertaking in India has keen interests in spirituality and believes in interpreting every life incident, good or bad into a meaningful experience of co-existence with the universe. He firmly believes that every human being possesses infinite potential hidden within him/her to make anything possible and achieve desired goals in life. The only need is to tap this hidden potential. He constantly engages himself in search of meaning to life and devotes much of his time to explore the world through inner enquiries and deep diving into ocean of knowledge available in the ancient Indian domain. He greatly reveres the Indian scriptures, Shrimad Bhagwad Gita and Ramayana. He believes that all great Yogis like Bhagwan Shri Krishna, Swami Vivekanada, Ramakrishna Paramhansa, Paramhansa Yogananda are his constant companions and guides in his journey of life. His motto in life is to be useful to the society and make a difference in the lives of people in whatever way possible.

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